यह एक विस्तृत
ब्रीफिंग दस्तावेज़ है जो दिए गए
स्रोतों से मुख्य
विषयों, विचारों और
महत्वपूर्ण तथ्यों की
समीक्षा करता है:
ब्रीफिंग दस्तावेज़: संचार और भाषा
की प्रकृति
परिचय:
यह दस्तावेज़ डॉ.
सुधींद्र एस.जी.
के "Behavioural
Genetics" के एपिसोड 16, "Communication
Languages" से प्राप्त जानकारी का
गहन विश्लेषण प्रस्तुत
करता है। यह भाषा की
प्रकृति, मनुष्यों और अन्य प्रजातियों में इसके
अधिग्रहण, मस्तिष्क में इसके
स्थानीयकरण और भाषा
व विचार के
बीच जटिल संबंधों
पर प्रकाश डालता
है।
मुख्य विषय और विचार:
1. भाषा
की परिभाषा और अन्य प्रजातियों
में संचार:
- पारंपरिक मानव-केंद्रित परिभाषा: परंपरागत रूप से,
भाषा को "बोले गए,
लिखित या हस्ताक्षरित शब्दों
के एक समूह
और अर्थ संप्रेषित
करने के तरीके" के
रूप में परिभाषित किया
गया है। यह परिभाषा
अक्सर जटिल व्याकरण को
शामिल करके मनुष्यों को
अन्य जानवरों से अलग
करती है।
- विस्तारित परिभाषा: डॉ. सुधींद्र एक
व्यापक परिभाषा प्रस्तुत करते
हैं: "यदि भाषा प्रतीकों
के एक सार्थक
अनुक्रम के माध्यम से
संवाद करने की क्षमता
है," तो वानर जैसी
प्रजातियाँ भी इस क्लब
में शामिल हो सकती
हैं।
- कान्ज़ी (Kanzi) का उदाहरण: कानज़ी नामक चिंपांज़ी
का मामला इस
विस्तार का एक महत्वपूर्ण
उदाहरण है। 1981 में गोद
लिए गए कानज़ी ने
अपनी माँ के पाठों
को देखकर अनायास
ही भाषा सीख
ली। उसने सहज रूप
से व्याकरण, वाक्य-विन्यास और अर्थ
की एक प्रारंभिक
समझ प्रदर्शित की। यह एक
"बहुत बड़ी बात" थी
क्योंकि कानज़ी, एक गैर-मानव, "अवलोकन के माध्यम
से अनायास भाषा
प्राप्त करने वाला पहला
वानर" था और उसने
व्याकरण की एक मौलिक
समझ दिखाई। यह मनुष्यों
की इस धारणा
को चुनौती देता
है कि भाषा
ही हमें अन्य
जानवरों से अलग करती
है।
- कान्ज़ी का महत्व: कानज़ी का जीवन,
जिसका 18 मार्च 2025 को 44 वर्ष की
आयु में निधन हो
गया, ने "सीखने और
संचार के बारे में
मानवीय धारणा को बदल
दिया।"
2. भाषा
की मूलभूत संरचना:
- तीन बिल्डिंग ब्लॉक्स: डॉ. सुधींद्र के
अनुसार, लगभग 7,000 विभिन्न मानवीय भाषाएँ,
चाहे वे कितनी भी
अलग क्यों न लगें,
तीन बुनियादी बिल्डिंग ब्लॉक्स
में टूट सकती हैं:
- ध्वनिग्राम (Phonemes): ये सबसे छोटी,
विशिष्ट ध्वनि इकाइयाँ हैं,
जैसे "अ", "ट", "च", "श"। अंग्रेजी
में लगभग 40 ध्वनिग्राम का
उपयोग होता है।
- रूपग्राम (Morphemes): ये अर्थ रखने
वाली सबसे छोटी इकाइयाँ
हैं। ये शब्द हो
सकते हैं या शब्दों
के हिस्से (जैसे
उपसर्ग या प्रत्यय)।
उदाहरण के लिए, "स्पीच"
शब्द एक रूपग्राम है
जिसमें चार ध्वनिग्राम ("स,"
"प," "ईई," "च") शामिल हैं।
- व्याकरण (Grammar): यह भाषा के
नियमों की प्रणाली है
जो रूपग्रामों को
व्यवस्थित करके हमें वह
कहने की अनुमति देती
है जो हम
कहना चाहते हैं। "अंग्रेजी
के वे 40 ध्वनिग्राम
हमें 100,000 से अधिक रूपग्राम
देते हैं जो ऑक्सफ़ोर्ड
इंग्लिश डिक्शनरी के 616,000 से
अधिक शब्दों का उत्पादन
करते हैं, जिन्हें असीमित
संख्या में वाक्यों, पैराग्राफों,
वू-टैंग गीतों
या शेक्सपियर के
नाटकों में व्यवस्थित किया
जा सकता है।"
3. भाषा
अधिग्रहण के चरण:
- शुरुआती पहचान (4 महीने): शिशु 4 महीने की
उम्र में भाषण में
अंतर पहचान सकते हैं
और होंठ पढ़ना
शुरू कर सकते हैं।
- ग्रहणशील भाषा (Receptive Language): इसी उम्र में,
ग्रहणशील भाषा की शुरुआत
होती है, "यानी जो कुछ
भी हमसे और
हमारे बारे में कहा
जा रहा है
उसे समझने की क्षमता।"
- बड़बड़ाना (Babbling - 4 महीने से): लगभग 4 महीने
से, शिशु बड़बड़ाना शुरू
करते हैं। यह वयस्क
भाषण की नकल नहीं
है और इसमें
कई भाषाओं की
ध्वनियाँ शामिल होती हैं।
बहरे बच्चे भी 10 महीने
की उम्र तक
अपने हाथों से बड़बड़ाना
शुरू कर देते हैं।
- ध्वनि भेद का नुकसान: अन्य भाषाओं के
संपर्क के बिना, एक
बच्चा अपनी घरेलू भाषा
का हिस्सा न
होने वाली विशिष्ट ध्वनियों
को सुनने और
बनाने की क्षमता खो
देगा।
- एक-शब्द चरण (1 वर्ष): अपने पहले जन्मदिन
के आसपास, अधिकांश
बच्चे एक-शब्द चरण
में प्रवेश करते हैं,
यह समझते हुए
कि ध्वनियों का
विशिष्ट अर्थ होता है।
- शब्द सीखने में उछाल (18 महीने): लगभग 18 महीने तक,
नए शब्द सीखने
की क्षमता प्रति
सप्ताह एक से बढ़कर
प्रति दिन एक हो
जाती है।
- दो-शब्द कथन (2 वर्ष): 2 साल तक, बच्चे
दो-शब्द वाक्यों
में बोलना शुरू कर
देते हैं, जिसे "टेलीग्राफिक
स्पीच" कहा जाता है
(जैसे "जूस चाहिए," "पेंट
नहीं")। ये
वाक्य भाषा के व्याकरण
के नियमों का
पालन करते हैं।
- पूर्ण वाक्य: अंततः, बच्चे लंबी
वाक्यांशों और पूर्ण वाक्यों
में बोलने लगते हैं।
4. भाषा
अधिग्रहण के सिद्धांत:
- बी.एफ. स्किनर और व्यवहारवाद: डॉ. सुधींद्र बी.एफ. स्किनर के
सिद्धांतों पर चर्चा करते
हैं, जो मानते थे
कि भाषा "सहयोगी
सिद्धांतों और क्रियाप्रसूत अनुबंधन
(operant conditioning) का एक उत्पाद" थी।
स्किनर के मॉडल में,
सुदृढीकरण (reinforcement) के माध्यम से
शब्दों को अर्थों से
जोड़ा जाता है (उदाहरण
के लिए, "मममम"
कहने पर दूध मिलना)।
- नोआम चॉम्स्की और जन्मजात शिक्षा: डॉ. सुधींद्र चॉम्स्की
के दर्शन का
भी शोध करते
हैं, जिन्होंने तर्क दिया कि
केवल अनुबंधन के माध्यम
से बच्चे अपनी
पूरी भाषाई क्षमता तक
नहीं पहुंच पाएंगे। चॉम्स्की
के सिद्धांतों के
आधार पर, डॉ. सुधींद्र
ने "जन्मजात शिक्षा" और
"सर्वव्यापी व्याकरणिक श्रेणियों" का विचार प्रस्तावित
किया।
- सार्वभौमिक व्याकरण (Universal Grammar):
डॉ. सुधींद्र का "सार्वभौमिक
व्याकरण" सिद्धांत मानता है
कि सभी मानवीय
भाषाओं में संज्ञा, क्रिया
और विशेषण होते
हैं, और मनुष्य "भाषा
प्राप्त करने की जन्मजात
क्षमता" के साथ पैदा
होते हैं, जिसमें व्याकरणिक
नियम सीखने की आनुवंशिक
प्रवृत्ति भी शामिल है।
"हम पहले दिन से
ही इसके लिए
हार्डवायर्ड हैं।"
- निष्कर्ष: अंततः, भाषा अधिग्रहण
के बारे में
अभी भी अनिश्चितता है,
लेकिन विकासात्मक शोध और अन्य
प्रजातियों के अध्ययन से
पता चलता है कि
"कम से कम इसका
कुछ हिस्सा जन्मजात है,
जबकि सीखने और संपर्क
की भूमिका भी
महत्वपूर्ण है।"
5. मस्तिष्क
में भाषा का स्थानीयकरण
और वाचाघात (Aphasia):
- कार्य का स्थानीयकरण: मस्तिष्क में कार्य
का स्थानीयकरण भाषा
के कुछ पहलुओं
के लिए सत्य
है।
- ब्रोका का क्षेत्र (Broca's Area): यह मस्तिष्क के
बाएँ ललाट लोब में
स्थित है और "भाषण
के उत्पादन" से
संबंधित है। इस क्षेत्र
में चोट लगने से
व्यक्ति भाषण को समझ
सकता है लेकिन बोलने
में संघर्ष कर सकता
है, हालांकि वह अभी
भी गा सकता
है।
- वर्निके का क्षेत्र (Wernicke's Area): यह बाएँ टेम्पोरल
लोब में स्थित है
और "भाषा की अभिव्यक्ति
और समझ" में
शामिल है। इस क्षेत्र
को नुकसान होने
पर, व्यक्ति बोल तो
पाएगा, लेकिन उसकी भाषा
"कोई अर्थ नहीं रखेगी,"
जैसे कि "यह दो
पिज्जा था मैंने बैंगनी
भाई को टेलीविजन पर
बुलाया।"
- वाचाघात (Aphasia): यह भाषा की
एक न्यूरोलॉजिकल हानि
है जो चोट,
स्ट्रोक, ट्यूमर या मनोभ्रंश
के कारण हो
सकती है। वाचाघात के
विभिन्न प्रकार होते हैं,
जो बोलने, पढ़ने,
लिखने या गाने की
क्षमता को प्रभावित कर
सकते हैं।
6. विचार
और भाषा का संबंध:
- वाचाघात और मस्तिष्क
की अन्य चोटें
हमें याद दिलाती हैं
कि "विचार और भाषा
दोनों अलग-अलग और
जटिल रूप से आपस
में जुड़े हुए हैं।"
- यह कहना मुश्किल
है कि गैर-मौखिक विचार पहले
आते हैं और फिर
हम उन्हें नाम
देने के लिए शब्दों
के बारे में
सोचते हैं, या यदि
"हमारे विचार भाषा में
पैदा होते हैं।"
- भाषा अक्सर हमारे
विचारों को आकार देती
है, और "आपकी सोच
वास्तव में इस बात
से प्रभावित हो
सकती है कि आप
किस भाषा का उपयोग
कर रहे हैं।"
- यदि भाषा की
परिभाषा को अन्य प्रजातियों
तक बढ़ाया जाए,
तो कानज़ी की
आलू मांगने की क्षमता
उसके विचारों को कैसे
प्रभावित कर सकती है,
और वह सोच
उसकी भाषा की प्रगति
और पहचान को
कैसे प्रभावित कर सकती
है?
निष्कर्ष:
डॉ. सुधींद्र एस.जी. का
यह एपिसोड भाषा
की जटिलता, इसके
अधिग्रहण के सार्वभौमिक
पैटर्न और मस्तिष्क
में इसके गहरी
जड़ें जमाए हुए
होने पर प्रकाश
डालता है। कानज़ी
का उदाहरण मनुष्य-केंद्रित भाषा की धारणा को
चुनौती देता है,
जबकि ध्वनिग्राम, रूपग्राम
और व्याकरण के
निर्माण खंड भाषा
की अंतर्निहित संरचना
को प्रकट करते
हैं। भाषा अधिग्रहण
पर конкуर्टिंग सिद्धांत
(स्किनर बनाम चॉम्स्की)
इस बात पर बहस को
उजागर करते हैं
कि क्या भाषा
मुख्य रूप से सीखी जाती
है या जन्मजात
है, जिसमें शोध
अब दोनों कारकों
के महत्व की
ओर इशारा करता
है। मस्तिष्क के
क्षेत्रों, जैसे ब्रोका
और वर्निके के
क्षेत्रों, और वाचाघात
जैसी स्थितियों का
अध्ययन भाषा और विचार के
बीच अटूट संबंध
को और मजबूत
करता है। यह सब हमें
इस बात पर विचार करने
के लिए प्रेरित
करता है कि हमारी भाषा
हमारी दुनिया की
धारणा और हमारी
पहचान को कैसे आकार देती
है।
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