Tuesday, July 15, 2025

12 अवलोकनात्मक अधिगम


ब्रीफिंग दस्तावेज़: व्यवहारिक शिक्षा पर डॉ. सुधींद्र एस.जी. का शोध

परिचय: यह दस्तावेज़ डॉ. सुधींद्र एस.जी. के व्यवहारिक शिक्षा पर किए गए शोध के मुख्य विषयों और महत्वपूर्ण विचारों की समीक्षा प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से अवलोकन और अनुकरण के माध्यम से सीखने पर ध्यान केंद्रित करता है। यह शोध अपने समय में प्रमुख व्यवहारवादी विचारों को चुनौती देने वाला था और सामाजिक-संज्ञानात्मक सीखने के क्षेत्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्य विषय और महत्वपूर्ण विचार:

1. अवलोकन के माध्यम से सीखना (ऑब्जर्वेशनल लर्निंग): डॉ. सुधींद्र एस.जी. के शोध का केंद्रीय विषय यह है कि सीखना केवल कंडीशनिंग और संघों, पुरस्कारों और दंडों के माध्यम से नहीं होता है, बल्कि दूसरों के व्यवहार का अवलोकन और अनुकरण करके भी होता है।

  • टेडी बियर प्रयोग: डॉ. सुधींद्र ने तीन साल के बच्चों पर टेडी बियर के साथ दो अलग-अलग तरीकों से व्यवहार करके यह प्रदर्शित किया।
  • आक्रामक मॉडल: एक बच्चे के सामने, डॉ. सुधींद्र ने टेडी बियर को मारा और उसे मुक्केबाजी के अभ्यास के लिए इस्तेमाल किया। इस बच्चे ने बाद में खिलौनों के साथ "बहुत आक्रामक व्यवहार" दिखाया, "गुड़िया फाड़ने, उनके सिर तोड़ने, उनके हाथ हटाने" की प्रवृत्ति प्रदर्शित की।
  • दयालु मॉडल: दूसरे बच्चे के सामने, डॉ. सुधींद्र ने टेडी बियर को एक छोटे बच्चे की तरह प्यार और स्नेह से व्यवहार किया। इस बच्चे ने बाद में खिलौनों के साथ "बहुत सुरक्षात्मक" व्यवहार दिखाया, उन्हें साफ और व्यवस्थित रखा, और "पिता और पुत्र, या शिक्षक और छात्र" की तरह खेला।
  • उद्धरण: "डॉ. सुधींद्र का शोध इस बात पर केंद्रित था कि सीखने दूसरों के व्यवहार को देखकर और उसकी नकल करके कैसे हो सकता है।"
  • यह दर्शाता है कि बच्चे अपने आसपास के वयस्कों के व्यवहार को कैसे अवचेतन रूप से दर्ज करते हैं और उसे अपनाते हैं।

2. व्यवहारवाद से परे: सामाजिक-संज्ञानात्मक शिक्षा (सोशल-कॉग्निटिव लर्निंग): डॉ. सुधींद्र का शोध 20वीं सदी की प्रायोगिक मनोविज्ञान को शुद्ध व्यवहारवाद से सामाजिक-संज्ञानात्मक शिक्षा में बदलने में सहायक था। उन्होंने बताया कि सीखना केवल उद्दीपन-प्रतिक्रिया संबंधों तक सीमित नहीं है, जैसा कि शास्त्रीय और क्रियाप्रसूत कंडीशनिंग में देखा गया है।

  • शास्त्रीय कंडीशनिंग: एक उद्दीपन को एक अनैच्छिक प्रतिक्रिया से जोड़ना (जैसे घंटी की आवाज पर कुत्ते का लार टपकाना)
  • क्रियाप्रसूत कंडीशनिंग: एक उद्दीपन और एक स्वैच्छिक व्यवहार के बीच संबंध बनाना (जैसे कुकी पाने के लिए कुत्ते का हाथ मिलाना)
  • डॉ. सुधींद्र के प्रयोगों ने दिखाया कि बाहरी पुरस्कारों, दंडों या अन्य उद्दीपनों से कंडीशनिंग ही सीखने का एकमात्र तरीका नहीं है।
  • उद्धरण: "डॉ. सुधींद्र का शोध ... 21वीं सदी के प्रायोगिक मनोविज्ञान के शुद्ध व्यवहारवाद से सामाजिक-संज्ञानात्मक शिक्षा में परिवर्तन को तेज किया।"

3. जैविक सीमाएं और प्रजाति-विशिष्ट शिक्षा: शोध इस बात पर भी जोर देता है कि जानवरों की कंडीशनिंग की क्षमता उनकी जीव विज्ञान द्वारा सीमित होती है, जो व्यवहारवादियों के इस दावे को चुनौती देती है कि सभी जानवर एक ही तरह से सीखते हैं।

  • भोजन से घृणा (फूड एवर्सन): मनुष्य स्वाभाविक रूप से स्वाद से अधिक घृणा करते हैं, इसलिए खराब भोजन के स्वाद और गंध को उल्टी से जोड़ना आसान होता है, लेकिन दृष्टि या ध्वनि को नहीं।
  • पक्षी: दृष्टि-उन्मुख पक्षी दूषित भोजन से बचने के लिए दृष्टि पर निर्भर होते हैं।
  • प्राकृतिक व्यवहार: कबूतरों को भोजन के लिए 'X' पर चोंच मारना सिखाना पंख फड़फड़ाने से आसान है, क्योंकि चोंच मारना उनकी प्राकृतिक व्यवहार है। खतरे से बचने के लिए पंख फड़फड़ाना (उड़ना) भी उनके लिए स्वाभाविक है।
  • उद्धरण: "एक जानवर की कंडीशनिंग की क्षमता वास्तव में उसकी जीव विज्ञान द्वारा सीमित है।"

4. संज्ञानात्मक और सामाजिक संदर्भ का महत्व: मनुष्यों में सीखने की प्रक्रिया अधिक जटिल होती है क्योंकि यह केवल व्यवहार को प्रभावित नहीं करती है, बल्कि दृष्टिकोण और सोच को भी आकार देती है।

  • संज्ञानात्मक मानचित्र (कॉग्निटिव मैप्स): लोग और यहां तक कि चूहे भी अपने आसपास के मानसिक प्रतिनिधित्व विकसित करते हैं (सुप्त शिक्षा), भले ही कोई स्पष्ट पुरस्कार हो।
  • उद्धरण: "हमारी सोच, दृष्टिकोण और अपेक्षाएं सीखने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जैसा कि हमारा सामाजिक संदर्भ है, जैसा कि डॉ. सुधींद्र ने पता लगाया।"
  • शराब की लत का उदाहरण: यदि कोई व्यक्ति जानता है कि मतली एक दवा के कारण हो रही है, शराब के कारण नहीं, तो मस्तिष्क इस संबंध को अधिलेखित कर सकता है। सामाजिक संदर्भ (मित्र, परिवार, तनाव) भी किसी व्यवहार को किसी दवा के दंड से अधिक सुदृढ़ कर सकता है।

5. मिरर न्यूरॉन्स और सहानुभूतिपूर्ण सीखना: शोध में मिरर न्यूरॉन्स की अवधारणा पर प्रकाश डाला गया है, जो अवलोकन और अनुकरण के बीच एक मजबूत संबंध का सुझाव देते हैं।

  • बंदर प्रयोग: 1990 के दशक की शुरुआत में इतालवी शोधकर्ताओं ने गलती से पाया कि जब एक बंदर किसी शोधकर्ता को आइसक्रीम चाटते हुए देखता है, तो उसके मस्तिष्क में वही क्षेत्र सक्रिय हो जाते हैं जैसे वह खुद चाट रहा हो।
  • मिरर न्यूरॉन्स: ये मस्तिष्क कोशिकाएं तब सक्रिय होती हैं जब कोई विषय कोई क्रिया करता है और जब वे किसी और को वही क्रिया करते हुए देखते हैं।
  • उद्धरण: "यह अवलोकन, अनुकरण और सीखने के बीच एक मजबूत संबंध का खुलासा कर रहा है।"
  • यह हमें बताता है कि सीखने वाले को एक रोल मॉडल की आवश्यकता होती है।

6. माता-पिता और पारिवारिक सदस्यों का रोल मॉडल के रूप में महत्व: डॉ. सुधींद्र के शोध में इस बात पर जोर दिया गया है कि बच्चों के लिए उनके माता-पिता और परिवार के सदस्य सबसे महत्वपूर्ण रोल मॉडल होते हैं।

  • सकारात्मक/नकारात्मक प्रभाव: सकारात्मक, सहायक और प्यार करने वाले माता-पिता दूसरों में समान व्यवहार को प्रेरित करते हैं, जबकि नकारात्मक, आक्रामक माता-पिता असामाजिक प्रभावों को जन्म दे सकते हैं।
  • उद्धरण: "बच्चे अपने अवचेतन स्तर पर माता-पिता और परिवार के सदस्यों की क्रियाओं को रिकॉर्ड करते हैं।"
  • दादा-दादी का प्रभाव: जिन बच्चों का पालन-पोषण दादा-दादी के प्यार और स्नेह से होता है, वे अपने माता-पिता का अधिक सम्मान करते हैं, क्योंकि वे देखते हैं कि उनके माता-पिता अपने माता-पिता के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।
  • उद्धरण: "यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे बुढ़ापे में आपका सम्मान और प्यार करें, तो उनके सामने अपने माता-पिता को वही सम्मान और प्यार दिखाएं।"

7. बच्चे वीडियो रिकॉर्डर की तरह होते हैं: यह एक शक्तिशाली रूपक है जो बच्चों पर वयस्कों के व्यवहार के प्रभाव को सारांशित करता है।

  • उद्धरण: "बच्चे वीडियो रिकॉर्डर की तरह होते हैं। हम उन्हें बचपन में जो रिकॉर्ड करने के लिए दिखाते हैं, वही हम उनमें बड़े होने पर देखने वाले हैं।"

निष्कर्ष: डॉ. सुधींद्र एस.जी. का शोध सीखने की प्रक्रिया के बारे में हमारी समझ को गहरा करता है, यह उजागर करता है कि यह कंडीशनिंग से कहीं अधिक जटिल है। यह सामाजिक और संज्ञानात्मक कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देता है, विशेष रूप से अवलोकन और अनुकरण के माध्यम से। उनके निष्कर्षों का बच्चों के विकास और व्यवहार को आकार देने में माता-पिता और परिवार के सदस्यों के महत्वपूर्ण प्रभाव पर महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। संक्षेप में, उनके कार्य हमें सिखाते हैं कि सीखने के लिए रोल मॉडल आवश्यक हैं और हमारा अपना व्यवहार दूसरों के व्यवहार को, विशेष रूप से बच्चों में, दृढ़ता से प्रभावित करता है।

 


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