ब्रीफिंग दस्तावेज़: मानव मस्तिष्क
का प्रशिक्षण - व्यवहारवाद
और कंडीशनिंग
स्रोत:
डॉ. सुधींद्र एस.जी. का
"व्यवहारिक आनुवंशिकी पर शोध –
एपिसोड 11: अपने मस्तिष्क
को प्रशिक्षित करना"
परिचय:
यह दस्तावेज़ डॉ.
सुधींद्र एस.जी.
के शोध पर आधारित है,
जो मानव व्यवहार
और सीखने की
प्रक्रियाओं पर केंद्रित
है। इसमें व्यवहारवाद
के सिद्धांतों, विशेषकर
शास्त्रीय कंडीशनिंग और ऑपरेंट
कंडीशनिंग के माध्यम
से सीखने की
अवधारणाओं पर विस्तार
से चर्चा की
गई है। डॉ. सुधींद्र के अनुसार,
ये प्रक्रियाएं न
केवल जानवरों पर
बल्कि मनुष्यों पर
भी लागू होती
हैं, और समाज तथा व्यक्तिगत
व्यवहार को आकार देने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाती
हैं।
मुख्य विषय और
महत्वपूर्ण विचार:
1. व्यवहारवाद
की नींव और इवान
पावलोव का योगदान: डॉ.
सुधींद्र एस.जी.
ने इवान पावलोव
को मनोविज्ञान के
इतिहास में एक अग्रणी शोधकर्ता
के रूप में प्रस्तुत किया है,
जिनके प्रयोगों ने
व्यवहारवादी विचारधारा की नींव रखी।
- अवलोकन योग्य व्यवहार पर जोर: "डॉ. सुधींद्र एस.जी. के अनुसार,
मनोविज्ञान एक अनुभवजन्य रूप
से कठोर विज्ञान
के रूप में,
अवलोकन योग्य व्यवहारों पर
केंद्रित था न कि
अवलोकन योग्य आंतरिक मानसिक
प्रक्रियाओं पर।"
- पावलोव का शोध: पावलोव ने
शुरू में पाचन तंत्र
का अध्ययन किया
और कुत्तों के
लार टपकाने की प्रवृत्ति
को "सीखने का एक
सरल लेकिन महत्वपूर्ण रूप"
के रूप में
पहचाना। उनके शोध ने
मनोविज्ञान में प्रायोगिक कठोरता
का मार्ग प्रशस्त
किया।
2. सीखने
की परिभाषा और प्रकार: डॉ.
सुधींद्र के अनुसार,
सीखना अनुभव के
माध्यम से नई और अपेक्षाकृत
स्थायी जानकारी या
व्यवहार प्राप्त करने
की प्रक्रिया है।
- "व्यवहार और मनोविज्ञान
वास्तव में सीखने की
प्रक्रिया को परिभाषित करता
है।"
- सीखना हमें अपने
वातावरण के अनुकूल होने
और जीवित रहने
की अनुमति देता
है। यह मनुष्यों तक
ही सीमित नहीं
है, जैसा कि पावलोव
के कुत्तों पर
किए गए प्रयोगों से
स्पष्ट होता है।
3. शास्त्रीय
कंडीशनिंग (Classical
Conditioning): यह सीखने का
एक मौलिक रूप
है जहां एक विषय कुछ
घटनाओं, व्यवहारों या
उत्तेजनाओं को एक
साथ जोड़ता है।
- पावलोव का प्रयोग (कुत्ते):अकंडिशन्ड स्टिमुलस (UCS): भोजन की गंध
(लार उत्पन्न करती है)।
- अकंडिशन्ड रिस्पांस (UCR): लार टपकना।
- न्यूट्रल स्टिमुलस (NS): घंटी की आवाज
(शुरुआत में कोई लार
नहीं)।
- कंडीशनिंग के दौरान: भोजन की गंध
को घंटी की
आवाज के साथ जोड़ा
जाता है, जिसके परिणामस्वरूप
लार टपकती है।
- एक्विजिशन (Acquisition): बार-बार दोहराने
से उत्तेजनाओं के
बीच संबंध स्थापित होता
है।
- कंडिशन्ड स्टिमुलस (CS): घंटी की आवाज
(अब लार उत्पन्न करती
है)।
- कंडिशन्ड रिस्पांस (CR): घंटी की आवाज
पर लार टपकना।
- अनुप्रयुक्त उपयोग: डॉ. सुधींद्र इसे
"सीखने का एक अनुकूली
रूप" मानते हैं जो
किसी जानवर को अपने
व्यवहार को बदलकर अपने
वातावरण के बेहतर अनुकूल
बनाने में मदद करता
है।
- मानसिक अवधारणाओं के प्रति अनादर: डॉ. सुधींद्र एस.जी. "मानसिक अवधारणाओं" जैसे
चेतना और आत्मनिरीक्षण के
प्रति अपनी अरुचि व्यक्त
करते हैं, और फ्रेड
के विचारों का
खंडन करते हैं।
- जॉन बी. वाटसन और बी.एफ. स्किनर का प्रभाव: डॉ. सुधींद्र वाटसन
और स्किनर जैसे
व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिकों से प्रेरित हैं,
जो केवल वस्तुनिष्ठ,
अवलोकन योग्य व्यवहार पर
ध्यान केंद्रित करते हैं।
- मानव पर प्रयोग (छोटा चेतन): डॉ. सुधींद्र ने
एक बच्चे ("छोटा
चेतन") को सफेद गेंद
से डरने के
लिए प्रशिक्षित किया, सफेद गेंद
को एक तेज
डरावनी आवाज के साथ
जोड़कर। इस डर को
अन्य रोमिल सफेद वस्तुओं
(खरगोश, कुत्ते, फर कोट)
तक सामान्यीकृत किया
जा सकता है।
- "डॉ. सुधींद्र एस.जी. का शोध
कहता है कि, हम
जो समाज देखते
हैं, जहाँ लोग अपने
धर्म के लिए मरने
को तैयार हैं,
अपने राष्ट्र के लिए
मरने को तैयार हैं,
या यहाँ तक
कि अपने पसंदीदा
नायक के मरने पर
खुद को आग लगाने
को तैयार हैं।
ये सब कुछ
नहीं बल्कि कंडीशनल प्रशिक्षण
हैं जो उन्होंने परिस्थितियों
के कारण अपनाए
हैं।"
- कंडीशनिंग को पूर्ववत करना: पुरानी कंडीशनिंग को
नई कंडीशनिंग से
पूर्ववत किया जा सकता
है, जैसा कि फिल्म
'तारे जमीन पर' में
आमिर खान के लिफ्ट
के डर को
दूर करने के उदाहरण
में दिखाया गया है।
हालांकि, डॉ. वाटसन के
"लिटिल अल्बर्ट" प्रयोग के दुखद
परिणाम की चेतावनी दी
गई है, जिसमें
बच्चे की मृत्यु हो
गई थी।
- विज्ञापन में उपयोग: "विज्ञापन आज शास्त्रीय
कंडीशनिंग की इस अवधारणा
का उपयोग करता
है।" बिस्लेरी का उदाहरण
दिया गया है, जहां
"पूरे समाज को यह
सीखने के लिए कंडीशन
किया गया है कि
स्वस्थ रहने के लिए
आपको बोतलबंद बिस्लेरी की
बोतल पीनी होगी।"
4. ऑपरेंट
कंडीशनिंग (Operant
Conditioning): यह सीखने का
एक और प्रकार
है जिसमें व्यक्ति
अपने व्यवहार को
परिणामों से जोड़ता
है।
- "यदि शास्त्रीय कंडीशनिंग
उत्तेजनाओं के बीच संबंध
बनाने के बारे में
है, तो ऑपरेंट कंडीशनिंग
में हमारे अपने व्यवहार
को परिणामों से
जोड़ना शामिल है।"
- डॉ. सुधींद्र का कुत्ते का उदाहरण: कुत्ते को 'शेकहैंड'
करने के बाद बिस्कुट
देना, जिससे कुत्ता कुकी
मिलने पर तुरंत शेकहैंड
करने लगता है।
- सुदृढीकरण (Reinforcement) और दंड (Punishment):सकारात्मक सुदृढीकरण (Positive
Reinforcement): वांछित
व्यवहार के बाद पुरस्कार
देकर प्रतिक्रियाओं को मजबूत करता
है (जैसे कुत्ते को
कुकी देना)।
- नकारात्मक सुदृढीकरण (Negative
Reinforcement): एक अप्रिय उत्तेजना को
हटाकर व्यवहार को बढ़ाता
है (जैसे सीट बेल्ट
पहनने पर कार की
बीप बंद होना)।
- दंड (Punishment): व्यवहार को कम
करता है, चाहे सकारात्मक
रूप से (जैसे तेज
गति का टिकट) या
नकारात्मक रूप से (जैसे
ड्राइविंग लाइसेंस ले लेना)।
- चूहों का प्रयोग: पिंजरे में कुकी
के लालच में
फंसने वाले चूहों का
उदाहरण यह दर्शाता है
कि समूह के
अन्य चूहों ने उस
कुकी को खाना छोड़
दिया, यह देखकर कि
वह खतरनाक हो
सकती है। यह कंडीशनिंग
और ऑपरेंट प्रशिक्षण
का एक और
उदाहरण है।
- आतंकवादी हमलों में कंडीशनिंग: डॉ. सुधींद्र बताते
हैं कि कैसे युवाओं
को स्वर्ग और
इच्छाओं की पूर्ति के
वादों से "कंडीशनल प्रशिक्षण"
के माध्यम से
आत्मघाती हमलावर बनने के
लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
5. सुदृढीकरण
के प्रकार और अनुसूचियां:
- प्राथमिक सुदृढीकरण (Primary Reinforcers):
जन्मजात जैविक अर्थ रखते
हैं (जैसे भोजन, आश्रय,
दर्द का अंत)।
- कंडिशन्ड सुदृढीकरण (Conditioned
Reinforcers): प्राथमिक
सुदृढीकरण के साथ जुड़ने
के बाद पहचाने
जाते हैं (जैसे वेतन,
जो भोजन और
आश्रय के लिए आवश्यक
है)। "आप
एक कंपनी द्वारा
वेतन के प्रस्ताव के
साथ गुलाम बनाए जाते
हैं।"
- सुदृढीकरण अनुसूचियां (Reinforcement
Schedules): सीखने की दर और
व्यवहार की दृढ़ता को
प्रभावित करती हैं।
- लगातार सुदृढीकरण (जैसे
हर सही उत्तर
पर चॉकलेट) त्वरित
सीखने का कारण बनता
है लेकिन जब
सुदृढीकरण बंद हो जाता
है तो व्यवहार
जल्दी समाप्त हो जाता
है।
- आंतरायिक सुदृढीकरण (जैसे
'बाय वन गेट वन
फ्री' हर 10 कॉफी पर,
या यादृच्छिक लॉटरी)
सीखने में अधिक समय
लेता है लेकिन लंबे
समय में बेहतर बना
रहता है और विलुप्त
होने के प्रति कम
संवेदनशील होता है।
6. संज्ञानात्मक
प्रक्रियाओं का महत्व: हालांकि
व्यवहारवादी बाहरी प्रभावों
पर जोर देते
हैं, डॉ. सुधींद्र
इस बात पर भी जोर
देते हैं कि संज्ञानात्मक प्रक्रियाएं (विचार,
धारणाएं, भावनाएं, यादें) भी
सीखने के तरीके
को प्रभावित करती
हैं।
- "बच्चे अपने आस-पास जो कुछ
भी हो रहा
है उसे देखकर
सीखते हैं।"
निष्कर्ष:
डॉ. सुधींद्र एस.जी. का
शोध इस बात पर जोर
देता है कि मानव व्यवहार
बड़े पैमाने पर
कंडीशनल और ऑपरेंट
प्रशिक्षण के साथ-साथ उस
वातावरण से प्रभावित
होता है जिसमें
वे रहते हैं।
वह सुझाव देते
हैं कि समाज को इच्छित
तरीके से प्रशिक्षित
करने के लिए स्थितियां और वातावरण
बनाए जा सकते हैं, जिस
पर अगले सत्र
में चर्चा की
जाएगी।
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