निश्चित रूप से, डॉ.
सुधींद्र एस.जी. के "व्यवहारिक आनुवंशिकी और मनोविज्ञान का परिचय" से प्राप्त
जानकारी का विस्तृत विवरण यहाँ दिया गया है:
ब्रीफिंग दस्तावेज़:
मनोविज्ञान के मुख्य विषय और विचार (डॉ. सुधींद्र एस.जी. के अनुसार)
यह दस्तावेज़ डॉ.
सुधींद्र एस.जी. के "व्यवहारिक आनुवंशिकी और मनोविज्ञान का परिचय" पर आधारित
है, जिसमें मनोविज्ञान के मुख्य विषयों, ऐतिहासिक विकास और सबसे महत्वपूर्ण विचारों
या तथ्यों की समीक्षा की गई है।
1. मनोविज्ञान की
जटिलता और उद्देश्य
डॉ. सुधींद्र के अनुसार,
"अन्य मानव मस्तिष्कों को छोड़कर, आपका मस्तिष्क ब्रह्मांड का सबसे जटिल टुकड़ा
है जिसके बारे में मनुष्य वर्तमान में जानते हैं।" मस्तिष्क के नियम रहस्यमय और
मायावी हैं, और यद्यपि हमारा मस्तिष्क स्वयं को पूरी तरह से समझने के लिए पर्याप्त
जटिल नहीं हो सकता है, फिर भी हम प्रयास करना बंद नहीं करेंगे।
- व्युत्पत्ति और परिभाषा: 'मनोविज्ञान' शब्द
लैटिन शब्द से आया है जिसका अर्थ है "आत्मा का अध्ययन"। इसकी औपचारिक
परिभाषा दशकों से विकसित हुई है, और आज इसे "व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं
का विज्ञान" के रूप में सुरक्षित रूप से परिभाषित किया जा सकता है।
- मुख्य प्रश्न: मनोविज्ञान बड़े प्रश्नों को
संबोधित करता है जैसे:
- मानव भयावह कार्य क्यों करते हैं, और हम उन्हें
बुरा क्यों मानते हैं?
- क्या हमारी स्वतंत्र इच्छा है, या हम पर्यावरण,
जीव विज्ञान और अचेतन प्रभावों से प्रेरित हैं?
- मानसिक बीमारी क्या है, और हम इसके बारे में
क्या कर सकते हैं?
- चेतना क्या है, या स्वयं की धारणा क्या है?
2. मनोविज्ञान का
ऐतिहासिक विकास
मानवों में हमेशा
स्वयं के बारे में जिज्ञासा रही है।
- प्रारंभिक चिंतन:
- अरस्तू ने सोचा कि चेतना का केंद्र हृदय में
है, न कि सिर में - जिसे बाद में "पूरी तरह से गलत" पाया गया।
- दो हज़ार साल पहले, चीनी शासकों ने सार्वजनिक
अधिकारियों के लिए व्यक्तित्व और बुद्धिमत्ता परीक्षणों की आवश्यकता वाले पहले
मनोवैज्ञानिक परीक्षण आयोजित किए थे।
- 1800 के दशक में, फारसी चिकित्सक मुहम्मद
इब्न ज़कारिया अल-रहाज़ेस (रहाज़ेस) मानसिक बीमारी का वर्णन करने वाले पहले लोगों
में से एक थे और उन्होंने बगदाद के अपने अस्पताल में "बहुत शुरुआती मनोरोग
वार्ड" में रोगियों का इलाज भी किया।
- आधुनिक मनोविज्ञान की शुरुआत:
- वैज्ञानिक मनोविज्ञान की शुरुआत 1879 में
जर्मनी में हुई जब विल्हेम वुंड्ट ने लीपज़िग विश्वविद्यालय में पहली मनोविज्ञान
प्रयोगशाला स्थापित की। उन्होंने अपनी पुस्तक प्रिंसिपल्स ऑफ फिजियोलॉजिकल
साइकोलॉजी प्रकाशित की, जिसे पहली सच्ची मनोविज्ञान पाठ्यपुस्तक माना जाता
है।
3. प्रमुख विचारधाराएँ
फ्रायड के समय के
आसपास, मानव मन के अध्ययन के तरीके के बारे में कई अलग-अलग विचारधाराएँ थीं।
- संरचनावाद (Structuralism):
- वुंड्ट और उनके छात्र एडवर्ड ब्रैडफोर्ड टिटचेनर
ने रसायनज्ञों और भौतिकविदों से संकेत लिए। उनका तर्क था कि यदि वे सभी पदार्थ
को सरल तत्वों या संरचनाओं में तोड़ सकते हैं, तो वे मस्तिष्क के लिए भी ऐसा क्यों
नहीं कर सकते?
- उन्होंने रोगियों को अंतर्दृष्टि के माध्यम
से चेतना की संरचनाओं को समझने की कोशिश की, उनसे पूछा कि सूरज ढलते हुए या कॉफी
की गंध महसूस करते हुए उन्हें कैसा लगा।
- डॉ. सुधींद्र के अनुसार, टिटचेनर ने इस दृष्टिकोण
को 'संरचनावाद' नाम दिया, लेकिन यह इतना अधिक आत्मनिरीक्षण पर निर्भर था कि यह
"बहुत व्यक्तिपरक" हो गया और "अल्पकालिक" रहा।
- प्रकार्यवाद (Functionalism):
- अमेरिकी चिकित्सक और दार्शनिक विलियम जेम्स
ने प्रश्नों का एक अलग समूह प्रस्तावित किया, जिसमें ध्यान केंद्रित किया गया
कि हम क्यों सोचते हैं, महसूस करते हैं, गंध करते हैं और चाटते हैं - संक्षेप
में, "व्यवहार के कार्य" पर।
- यह दृष्टिकोण चार्ल्स डार्विन के विचार पर
आधारित था कि अनुकूली व्यवहार विकासवादी प्रक्रिया में संरक्षित रहते हैं।
- जेम्स ने 1890 में अपनी सेमिनल पुस्तक द
प्रिंसिपल्स ऑफ साइकोलॉजी प्रकाशित की, जिसमें मनोविज्ञान को "मानसिक
जीवन का विज्ञान" के रूप में परिभाषित किया गया।
- मनोविश्लेषण (Psychoanalysis):
- सिगमंड फ्रायड (1856-1939) "अपने समय
के सबसे जबरदस्त प्रभावशाली और विवादास्पद विचारकों में से एक" थे। उनके
सिद्धांतों ने बचपन, व्यक्तित्व, सपनों और कामुकता पर हमारे विचारों को बनाने
में मदद की।
- 1886 में, फ्रायड ने तंत्रिका विकारों में
विशेषज्ञता वाली अपनी खुद की प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने अपने सहयोगी जोसेफ ब्रेउर
को अन्ना ओ नामक रोगी का "एक नए 'टॉकिंग क्योर' से इलाज करते हुए" देखा,
जहाँ रोगी को अपने लक्षणों के बारे में बात करने की अनुमति थी, जिससे उनके लक्षण
कम हो गए।
- यह फ्रायड के लिए एक सफलता थी। उन्होंने मरीजों
को जो भी मन में आता था, उसे स्वतंत्र रूप से बात करने के लिए प्रोत्साहित किया
- "मुक्त साहचर्य" (free association)।
- 1900 में, उन्होंने अपनी पुस्तक द इंटरप्रिटेशन
ऑफ ड्रीम्स प्रकाशित की, जहाँ उन्होंने अपने मनोविश्लेषण के सिद्धांत को प्रस्तुत
किया।
- मुख्य विचार: मनोविश्लेषण का एक "कट्टरपंथी
मूल" यह था कि "हमारे व्यक्तित्व अचेतन उद्देश्यों द्वारा आकार लेते
हैं।" फ्रायड ने सुझाव दिया कि हम सभी उन मानसिक प्रक्रियाओं से गहराई से
प्रभावित होते हैं जिनके बारे में हमें पता भी नहीं होता।
- डॉ. सुधींद्र के अनुसार, "यह विचार कि
हमारा मन किसी ऐसी चीज़ से संचालित हो सकता है जिसके बारे में हमारे मन को खुद
नहीं पता था, समझना मुश्किल था।"
- हालांकि अचेतन अज्ञात है, इसे चिकित्सकीय
तकनीकों के माध्यम से "खोजा" जा सकता है जिसमें सपने, अनुमान और मुक्त
साहचर्य का उपयोग दबी हुई भावनाओं को बाहर निकालने और आत्म-ज्ञान प्राप्त करने
के लिए किया जाता है।
- फ्रायड ने तर्क दिया कि "मानसिक विकारों
को टॉक थेरेपी और आत्म-खोज के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।" यह एक
"वास्तव में बड़ी सफलता" थी, क्योंकि इससे पहले, मानसिक बीमारियों वाले
लोगों को आमतौर पर अस्पतालों में बंद कर दिया जाता था या उन्हें बांध दिया जाता
था।
- फ्रायड ने 20 से अधिक पुस्तकें और अनगिनत
पत्र प्रकाशित किए। उनका निधन सितंबर 1939 में 83 वर्ष की आयु में हुआ।
- व्यवहारवाद (Behaviorism):
- 20वीं शताब्दी के पहले भाग में व्यवहारवाद
ने प्रमुखता प्राप्त की, जिसमें इवान पावलोव, जॉन बी. वाटसन और बी. एफ. स्किनर
जैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति शामिल थे।
- उन्होंने "अवलोकन योग्य व्यवहार के अध्ययन"
पर ध्यान केंद्रित किया। स्किनर ने बिहेवियर ऑफ ऑर्गेनिज़म्स प्रकाशित
किया, जिसने व्यवहारवाद के युग की शुरुआत की, जो 1960 के दशक तक "पूरा चलन"
बना रहा।
4. समकालीन मनोविज्ञान
का एकीकृत स्वरूप
मध्य-20वीं शताब्दी
तक, मनोविज्ञान में अन्य प्रमुख शक्तियाँ भी विकसित हो रही थीं:
- मानवतावादी मनोविज्ञान (Humanist
psychology): जो "व्यक्तिगत विकास के पोषण" पर केंद्रित है।
- संज्ञानात्मक विज्ञान (Cognitive
science):
- तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience):
आज की मनोविज्ञान
की औपचारिक परिभाषा - "व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन" - इन सभी
विभिन्न विचारधाराओं से "एक अच्छा समामेलन" है।
- यह व्यवहार के अवलोकन और रिकॉर्डिंग की आवश्यकता
को पहचानता है, लेकिन यह हमारी मानसिक प्रक्रियाओं को भी श्रेय देता है: हम क्या
सोचते हैं, महसूस करते हैं और विश्वास करते हैं।
- डॉ. सुधींद्र जोर देते हैं कि "मनोविज्ञान
एक एकीकृत विज्ञान है।" यद्यपि "लोग अभी भी नाराज़ होते हैं और बहुत
असहमत होते हैं," अनुशासन का सार "दिलचस्प प्रश्न पूछने के विभिन्न
तरीके बनाने और सभी प्रकार के डेटा-संग्रह विधियों के माध्यम से उनका उत्तर देने
का प्रयास करने" से संबंधित है।
- मानव मन जटिल है, और इसे प्रभावी ढंग से खोलने
का कोई एक तरीका नहीं है; "इसे सभी तरफ से खोलने की जरूरत है।"
- हार्वर्ड के खगोलशास्त्री ओवेन जिंजरिच ने
भी स्वीकार किया है कि "मानव मस्तिष्क ब्रह्मांड में हमारे लिए ज्ञात सबसे
जटिल भौतिक वस्तु है।"
डॉ. सुधींद्र एस.जी.
का शोध मनोविज्ञान के व्यापक और विविध क्षेत्र पर प्रकाश डालता है, जो मानव मन की रहस्यमय
जटिलताओं को समझने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। अगली कड़ी में डॉ. सुधींद्र एस.जी.
के अनुसंधान कार्य के तरीकों पर चर्चा की जाएगी।
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